google.com, pub-5050673853034467, DIRECT, f08c47fec0942fa0 "गला बैठने और आवाज़ न निकलने पर अपनाएं ये 8 असरदार आयुर्वेदिक उपाय – तुरंत पाएं राहत!" Skip to main content

5 super suplyment

"गला बैठने और आवाज़ न निकलने पर अपनाएं ये 8 असरदार आयुर्वेदिक उपाय – तुरंत पाएं राहत!"

गला बैठने या आवाज़ न निकलने पर आयुर्वेदिक उपाय – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

गला बैठ जाना या आवाज़ का अचानक बंद हो जाना एक आम समस्या है, जिसका सामना अक्सर सर्दी, गले में संक्रमण, ज़्यादा बोलने या थकान के कारण करना पड़ता है। यह समस्या तब और भी गंभीर हो जाती है जब आवाज़ लंबे समय तक सामान्य न हो। आयुर्वेद में इस समस्या का स्थायी और प्राकृतिक समाधान मौजूद है। इस लेख में हम गला बैठने के कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार और सावधानियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।




📚 गला बैठने के प्रमुख कारण

1. सर्दी-जुकाम और संक्रमण

सर्दी-जुकाम के दौरान गले में सूजन और संक्रमण होने के कारण आवाज बैठ सकती है। ठंडी हवा और वायरस का सीधा प्रभाव गले की नसों पर पड़ता है जिससे आवाज कमजोर हो जाती है।

2. अत्यधिक बोलना या चिल्लाना

लंबे समय तक जोर-जोर से बोलने या चिल्लाने से वोकल कॉर्ड्स पर दबाव बढ़ता है जिससे आवाज बैठ सकती है। शिक्षक, गायक, वक्ता या कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।

3. धूल, धुएं और प्रदूषण का प्रभाव

वायु प्रदूषण, धूल और धुएं के संपर्क में आने से गले में जलन होती है, जिससे आवाज प्रभावित हो सकती है।

4. गले में एसिडिटी (Acid Reflux)

एसिडिटी बढ़ने पर पेट का एसिड गले तक पहुंच जाता है, जिससे गले की परत में जलन और सूजन हो जाती है। इसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) भी कहा जाता है।

5. गले की मांसपेशियों में तनाव

कभी-कभी तनाव और चिंता की वजह से गले की मांसपेशियां कस जाती हैं, जिससे आवाज बैठ सकती है।


🩺 गला बैठने के सामान्य लक्षण

  • आवाज का भारी हो जाना या फटना

  • गले में दर्द या जलन

  • बोलने में कठिनाई या आवाज का बंद हो जाना

  • निगलने में कठिनाई

  • सूखी खांसी या कफ जमा होना


🌿 आयुर्वेद में गला बैठने का कारण

आयुर्वेद के अनुसार, गला बैठना मुख्यतः ‘वात और कफ दोष’ के असंतुलन के कारण होता है। वात दोष से गले की नाड़ियां कमजोर हो जाती हैं और कफ दोष गले में बलगम और सूजन पैदा करता है। आयुर्वेद में इन दोषों को संतुलित करके गले की समस्या को दूर किया जा सकता है।


🌟 आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे

1. गुनगुना पानी और नमक से गरारे करें

विधि:

  • 1 गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाएं।

  • इस पानी से दिन में 2-3 बार गरारे करें।

लाभ:

  • यह गले की सूजन को कम करता है और संक्रमण से राहत देता है।

  • नमक में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो गले को साफ करते हैं।


2. अदरक और शहद का सेवन

विधि:

  • ताजा अदरक का रस निकालें और उसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं।

  • इसे दिन में 2-3 बार चाटें।

लाभ:

  • अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो गले की सूजन को कम करते हैं।

  • शहद गले को मुलायम बनाकर संक्रमण को खत्म करता है।


3. मुलेठी (Licorice) का सेवन

विधि:

  • 1-2 टुकड़े मुलेठी को मुंह में रखकर चूसें या इसका पाउडर गुनगुने पानी में मिलाकर पिएं।

  • आप चाहें तो मुलेठी का काढ़ा बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।

लाभ:

  • मुलेठी गले को ठंडक देती है और आवाज को जल्दी ठीक करती है।

  • यह गले की खराश, सूजन और संक्रमण को दूर करती है।


4. हल्दी-दूध का सेवन करें

विधि:

  • 1 गिलास गुनगुने दूध में 1 चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं।

  • रात को सोने से पहले इसका सेवन करें।

लाभ:

  • हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गले के संक्रमण को खत्म करते हैं।

  • यह आवाज को जल्दी सामान्य बनाता है।


5. तुलसी और अदरक की चाय

विधि:

  • 5-6 तुलसी के पत्ते और 1 इंच अदरक का टुकड़ा पानी में उबालें।

  • इसे छानकर 1 चम्मच शहद मिलाएं और गर्म-गर्म पिएं।

लाभ:

  • तुलसी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो गले के दर्द को ठीक करते हैं।

  • अदरक और शहद गले की खराश को दूर करते हैं।


6. भाप लेना (Steam Therapy)

विधि:

  • पानी में थोड़ी सी अजवाइन या 2-3 बूंद नीलगिरी तेल डालें।

  • सिर पर तौलिया रखकर 5-10 मिनट तक भाप लें।

लाभ:

  • भाप गले में जमे कफ को साफ करती है और सूजन को कम करती है।

  • यह गले को नम बनाए रखती है जिससे आवाज जल्दी ठीक हो जाती है।


7. लौंग और शहद का मिश्रण

विधि:

  • 2-3 लौंग को भूनकर पाउडर बना लें और उसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं।

  • इसे दिन में 2 बार चाटें।

लाभ:

  • लौंग में एंटीसेप्टिक और दर्दनिवारक गुण होते हैं जो गले की सूजन को कम करते हैं।

  • यह गले की खराश को जल्दी ठीक करता है।


8. शहद और नींबू का मिश्रण

विधि:

  • 1 चम्मच शहद में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं।

  • इसे दिन में 2-3 बार लें।

लाभ:

  • शहद गले की परत को मुलायम करता है और नींबू बैक्टीरिया को खत्म करता है।

  • यह गले की सूजन को कम करता है और आवाज को जल्दी ठीक करता है।


🍀 विशेष औषधियां और आयुर्वेदिक उपचार

1. कंठसुधा वटी

  • यह आयुर्वेदिक गोली गले की खराश, सूजन और संक्रमण में अत्यधिक लाभकारी है।

  • इसे दिन में 2-3 बार चूसने से गले में राहत मिलती है।

2. सप्तामृत लोह

  • यह आयुर्वेदिक औषधि गले और आवाज से संबंधित समस्याओं को दूर करती है।

3. तालीसादी चूर्ण

  • यह कफ और गले की समस्या को दूर करने में बहुत प्रभावी है।

  • इसे शहद के साथ मिलाकर सेवन करें।


⚠️ गले बैठने पर क्या न करें?

  • ठंडी और बर्फ वाली चीजों से परहेज करें।

  • अत्यधिक मसालेदार और तले हुए भोजन से बचें।

  • ज़्यादा बोलने या चिल्लाने से परहेज करें।

  • धूल, धुएं और प्रदूषण से बचाव करें।


🏆 योग और प्राणायाम से गले की देखभाल

1. भ्रामरी प्राणायाम

  • यह प्राणायाम गले को ठंडक देता है और तनाव को दूर करता है।

  • इसे रोजाना 5-7 मिनट करें।

2. उज्जायी प्राणायाम

  • यह गले की मांसपेशियों को मजबूत करता है और आवाज को बेहतर बनाता है।


📝 निष्कर्ष

आयुर्वेद में गला बैठने और आवाज़ न निकलने की समस्या के लिए प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार बताए गए हैं। हल्दी-दूध, अदरक-शहद, मुलेठी और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियां गले को जल्दी ठीक करने में मदद करती हैं। नियमित गरारे और भाप लेने से भी गले की सूजन और संक्रमण से राहत मिलती है। इन उपायों को अपनाकर आप जल्दी ही अपनी आवाज़ को सामान्य कर सकते हैं।

अगर समस्या 3-4 दिन तक बनी रहे तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क अवश्य करें।

Comments

Popular posts from this blog

हेयर कलर: बालों को नया लुक और स्टाइल देने का ट्रेंड

हेयर कलर: बालों को नया लुक और स्टाइल देने का ट्रेंड आजकल फैशन और स्टाइलिंग में हेयर कलर एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। शादी, पार्टी, या त्योहार—हर मौके के अनुसार लोग हेयर कलर चुनते हैं। युवाओं के लिए हेयर कलर सिर्फ एक स्टाइल नहीं, बल्कि एक पर्सनैलिटी स्टेटमेंट बन चुका है। इस आर्टिकल में हम हेयर कलर के प्रकार, फायदे-नुकसान, और हेयर केयर टिप्स के बारे में विस्तार से बताएंगे। हेयर कलर के प्रकार परमानेंट हेयर कलर (Permanent Hair Color): यह बालों की जड़ों तक पहुंचता है और लंबे समय तक टिकता है। परमानेंट हेयर कलर में अमोनिया और हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसे केमिकल्स होते हैं। सावधानी: लगाने से पहले स्किन टेस्ट जरूर करें। निर्देशानुसार ही प्रयोग करें। डेमी परमानेंट हेयर कलर (Demi-Permanent Hair Color): इसमें अमोनिया नहीं होता और हाइड्रोजन परॉक्साइड की मात्रा भी कम होती है। यह हेयर कलर 8-10 बार शैंपू करने तक टिकता है। सेमी परमानेंट हेयर कलर (Semi-Permanent Hair Color): यह कलर नेचुरल और सिंथेटिक दोनों वर्जन में मिलता है और 6-8 बार शैंपू करने से निकल जाता है। शॉर्ट टाइम हेयर क...

शिलाजीत: स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत

शिलाजीत: स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत शिलाजीत, आयुर्वेद का एक अनमोल खजाना, प्राकृतिक ऊर्जा का ऐसा स्रोत है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संपूर्ण रूप से मजबूत करता है। यह हिमालय की चट्टानों से निकाला गया खनिज-आधारित पदार्थ है, जो अपने गुणों के कारण आयुर्वेद में हजारों वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा है। संस्कृत में "शिलाजीत" का अर्थ है "पर्वतों का विजेता और कमजोरी का नाशक।" Darjuv9 का शिलाजीत कैप्सूल एक प्रमाणित, शुद्ध और प्रभावी उत्पाद है। यह न केवल ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि आपकी इम्यूनिटी, मांसपेशियों, और मानसिक स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है। Darjuv9 शिलाजीत कैप्सूल की खासियतें >65% Fulvic Acid से भरपूर: यह शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है। कोशिकाओं में पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता बढ़ाता है। 100% प्योर और ऑर्गेनिक: उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे शिलाजीत से निर्मित। इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया गया है। रूस से आयातित शिलाजीत: प्राकृतिक रूप से एकत्रित और लैब टेस्टेड...

Rootin all green स्वास्थ्य के लिए 12 महीनों की योजना:

  स्वास्थ्य के लिए 12 महीनों की योजना: Resveratrol, CoQ10, Astaxanthin, और Quercetin का महत्व स्वास्थ्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर को पोषण और ऊर्जा प्रदान करने के लिए सप्लीमेंट्स का महत्व बढ़ गया है।  इनमें #Resveratrol, #CoQ10, #Astaxanthin, और #Quercetin जैसे तत्व शरीर को दीर्घकालिक लाभ देते हैं। ये न केवल बीमारियों से बचाव करते हैं, बल्कि उम्र बढ़ने के प्रभावों को धीमा करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी सहायक हैं।  इन सप्लीमेंट्स (rootin all green)के माध्यम से आप कैसे अपने स्वास्थ्य को 12 महीनों में बेहतर बना सकते हैं। साथ ही, इन तत्वों की भूमिका और उनके लाभों पर भी चर्चा की जाएगी। Resveratrol: एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट Resveratrol प्राकृतिक रूप से रेड वाइन, अंगूर, और मूंगफली में पाया जाने वाला एक पॉलीफेनोल है। यह शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट(#antioxidant) गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करता है। Resveratrol के लाभ: हृदय स्वास्थ्य में सुधार: यह कोलेस्ट्रॉल लिपिड्स के स्तर को संतुलित (balance) कर...

"मधुमेह नियंत्रण: प्राकृतिक उपाय, आहार और जीवनशैली में बदलाव से रक्त शर्करा को नियंत्रित करें"

मधुमेह नियंत्रण: जानें कैसे प्राकृतिक उपाय मदद कर सकते हैं मधुमेह (डायबिटीज) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर सही तरीके से रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर नियंत्रित नहीं कर पाता। यह तब होता है जब शरीर में इंसुलिन का स्तर या तो कम होता है या शरीर उस इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। मधुमेह दो प्रकार का होता है—टाइप 1 और टाइप 2। मधुमेह के कारण टाइप 1 मधुमेह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह आमतौर पर बचपन या युवावस्था में होता है। दूसरी ओर, टाइप 2 मधुमेह आमतौर पर वयस्कों में देखा जाता है और यह जीवनशैली और आहार की आदतों से जुड़ा होता है। मधुमेह के लक्षण मधुमेह के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: अत्यधिक प्यास लगना बार-बार पेशाब आना घावों का धीमा ठीक होना थकावट और कमजोरी दृष्टि में धुंधलापन मधुमेह नियंत्रण के लिए प्राकृतिक उपाय मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आहार, शारीरिक गतिविधि, और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं कुछ प्रभावी प्राकृतिक उपाय: 1. आहार में सुधार फाइबर यु...

हेमोग्रो सिरप: आयरन की कमी को दूर करने वाला प्राकृतिक समाधान

  हेमोग्रो सिरप: आयरन की कमी को दूर करने वाला प्राकृतिक समाधान आधुनिक जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन की कमी आज एक आम समस्या बन गई है। खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। आयरन की कमी से एनीमिया जैसी स्थिति पैदा होती है, जिससे शरीर में कमजोरी, थकावट और कार्यक्षमता में कमी होती है। आयरन की कमी के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक सिरप के रूप में हेमोग्रो सिरप इस समस्या का समाधान प्रदान करता है। हेमोग्रो सिरप क्या है?    हेमोग्रो सिरप एक आयुर्वेदिक उत्पाद जो खून बढ़ाने में मदद करता है। यह शरीर में आयरन की कमी को दूर करता है और खून की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। शरीर में खून बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय के रूप में, यह सिरप खून को शुद्ध करता है, नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है और इम्यूनिटी को बढ़ाता है। हेमोग्रो सिरप की आवश्यकता क्यों? आयरन की कमी के लक्षण और प्रभाव आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन का एक प्रमुख घटक है, जो ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम करता है। इसकी कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं: कमजो...